• Red Coral/Moonga 6.03 Carat

    Sold By: Vanikart

    ज्योतिष और मूंगा रत्न के लाभ

    जन्मकुंडली में मंगल क्रूर होने, नीच का होने या फिर फलदायी होने पर उसके बुरे फल से बचने के लिए मूंगा धारण करते

    हैं। ज्योतिष में ऐसा माना जाता है यदि मूंगा शुद्ध हो और अच्छी जगह का हो तो इसको धारण करने वाले का मन प्रसन्न

    रहता है। बच्चे को मूंगा पहनाने पर उसे पेट दर्द और सूखा (कुपोषण) रोग नहीं होता है। जन्म के समय यदि सूर्य मेष राशि

    में हो या फिर जन्म 15 नवंबर से 14 दिसंबर के बीच हो तो ऐसे लोगों को मूंगा अवश्य धारण करना चाहिए। कुंडली में

    निम्न परिस्थितियां होने पर मूंगा धारण करने की सलाह दी जाती है।

    मंगल कुंडली में राहू या शनी के साथ कहीं भी स्थित हो तो मूंगा पहनना बहुत लाभ पहुंचाता है।

    मंगल अगर प्रथम भाव में हो तो भी मूंगा धारण करना बहुत लाभदायक होता है।

    मंगल यदि कुंडली में तीसरे भाव में हो तो भाई बहनों के साथ क्लेश कराता है। ऐसे में मूंगा धारण करना लाभदायक

    होता है और भाई बहनों के बीच प्रेम बना रहता है।

    चौथे भाव में मंगल जीवन साथी के स्वास्थ्य को खराब करता है। इस परिस्थिति में मूंगा धारण करने से जीवन साथी

    स्वस्थ्य रहता है।

    सप्तम और द्वादश भाव में बैठा मंगल अशुभ कारक होता है। यह जीवन साथी को कष्ट देता है और उनसे संघर्ष कराता है।

    इस स्थिति में मूंगा पहनना बहुत लाभ देता है।

    अगर कुंडली में धनेश मंगल नौवे भाव में, चतुर्थेश मंगल एकादश भाव में या पंचम भाव का स्वामी मंगल बारहवें भाव

    में हो तो मूंगा पहनना अत्यंत लाभकारी होता है।

    अगर कुंडली में नौवे भाव का स्वामी मंगल चौथे स्थान में हो या दशवें भाव का स्वामी मंगल पांचवें तथा ग्यारवें भाव में

    हो तो ऐसे में मूंगा पहनना अच्छा होता है।

    कुंडली में कहीं भी बैठा मंगल यदि सातवें, दसवें और ग्यारवें भाव को देख रहा होता है तो मूंगा धारण करना लाभदायक

    होता है।

    अगर मेष या वृश्चिक लग्न में मंगल छठे भाव में, पंचमेश मंगल दसवें भाव में, धनेश मंगल सप्तम भाव में, चतुर्थेश मंगल

    नौवे भाव में, नवमेश मंगल धन स्थान में, सप्तमेश मंगल द्वादश भाव में, दशमेश मंगल बाहरवें भाव में या फिर ग्यारवां

    मंगल चौथे भाव में हो तो मूंगा धारण करना अत्यंत लाभकरी होता है।

    छठे, आठवें और बारहवें भाव में मंगल स्थित हो तभी तो मूंगा धारण करना लाभकारी होता है।

    मंगल की दृष्टि सूर्य पर पड़ रही हो तो भी मूंगा पहनना लाभदायक होता है।

    कुंडली में मंगल चंद्रमा के साथ हो तो यदि मूंगा धारण किया जाए तो आर्थिक स्थिति अच्छी होती है।

    कुंडली में मंगल छठें भाव और आठवें भाव के स्वामी के साथ बैठा हो तो या इन ग्रहों की दृष्‍टि मंगल पर पड़ रही हो तो

    मूंगा धारण करने पर लाभ होता है।

    कुंडली में मंगल वक्री, अस्त या पहले भाव में हो तो मूंगा पहनकर इनके नकारात्‍मक प्रभावों से बचा जा सकता है।

    जन्मकुंडली में मंगल शुभ भावों का स्वामी हो लेकिन खुद शत्रु ग्रहों या अशुभ ग्रहों के साथ बैठा हो तो इसके अच्छे

    प्रभावों को शक्ति देने के लिए मूंगा धारण करना चाहिए।

    Discount Upto: 27%
    6,349.008,756.00
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    Red Coral/Moonga 6.03 Carat

    6,349.008,756.00
  • Red Coral/Moonga 6.05 Carat

    Sold By: Gems Stone

    ज्योतिष और मूंगा रत्न के लाभ

    जन्मकुंडली में मंगल क्रूर होने, नीच का होने या फिर फलदायी होने पर उसके बुरे फल से बचने के लिए मूंगा धारण करते

    हैं। ज्योतिष में ऐसा माना जाता है यदि मूंगा शुद्ध हो और अच्छी जगह का हो तो इसको धारण करने वाले का मन प्रसन्न

    रहता है। बच्चे को मूंगा पहनाने पर उसे पेट दर्द और सूखा (कुपोषण) रोग नहीं होता है। जन्म के समय यदि सूर्य मेष राशि

    में हो या फिर जन्म 15 नवंबर से 14 दिसंबर के बीच हो तो ऐसे लोगों को मूंगा अवश्य धारण करना चाहिए। कुंडली में

    निम्न परिस्थितियां होने पर मूंगा धारण करने की सलाह दी जाती है।

    मंगल कुंडली में राहू या शनी के साथ कहीं भी स्थित हो तो मूंगा पहनना बहुत लाभ पहुंचाता है।

    मंगल अगर प्रथम भाव में हो तो भी मूंगा धारण करना बहुत लाभदायक होता है।

    मंगल यदि कुंडली में तीसरे भाव में हो तो भाई बहनों के साथ क्लेश कराता है। ऐसे में मूंगा धारण करना लाभदायक

    होता है और भाई बहनों के बीच प्रेम बना रहता है।

    चौथे भाव में मंगल जीवन साथी के स्वास्थ्य को खराब करता है। इस परिस्थिति में मूंगा धारण करने से जीवन साथी

    स्वस्थ्य रहता है।

    सप्तम और द्वादश भाव में बैठा मंगल अशुभ कारक होता है। यह जीवन साथी को कष्ट देता है और उनसे संघर्ष कराता है।

    इस स्थिति में मूंगा पहनना बहुत लाभ देता है।

    अगर कुंडली में धनेश मंगल नौवे भाव में, चतुर्थेश मंगल एकादश भाव में या पंचम भाव का स्वामी मंगल बारहवें भाव

    में हो तो मूंगा पहनना अत्यंत लाभकारी होता है।

    अगर कुंडली में नौवे भाव का स्वामी मंगल चौथे स्थान में हो या दशवें भाव का स्वामी मंगल पांचवें तथा ग्यारवें भाव में

    हो तो ऐसे में मूंगा पहनना अच्छा होता है।

    कुंडली में कहीं भी बैठा मंगल यदि सातवें, दसवें और ग्यारवें भाव को देख रहा होता है तो मूंगा धारण करना लाभदायक

    होता है।

    अगर मेष या वृश्चिक लग्न में मंगल छठे भाव में, पंचमेश मंगल दसवें भाव में, धनेश मंगल सप्तम भाव में, चतुर्थेश मंगल

    नौवे भाव में, नवमेश मंगल धन स्थान में, सप्तमेश मंगल द्वादश भाव में, दशमेश मंगल बाहरवें भाव में या फिर ग्यारवां

    मंगल चौथे भाव में हो तो मूंगा धारण करना अत्यंत लाभकरी होता है।

    छठे, आठवें और बारहवें भाव में मंगल स्थित हो तभी तो मूंगा धारण करना लाभकारी होता है।

    मंगल की दृष्टि सूर्य पर पड़ रही हो तो भी मूंगा पहनना लाभदायक होता है।

    कुंडली में मंगल चंद्रमा के साथ हो तो यदि मूंगा धारण किया जाए तो आर्थिक स्थिति अच्छी होती है।

    कुंडली में मंगल छठें भाव और आठवें भाव के स्वामी के साथ बैठा हो तो या इन ग्रहों की दृष्‍टि मंगल पर पड़ रही हो तो

    मूंगा धारण करने पर लाभ होता है।

    कुंडली में मंगल वक्री, अस्त या पहले भाव में हो तो मूंगा पहनकर इनके नकारात्‍मक प्रभावों से बचा जा सकता है।

    जन्मकुंडली में मंगल शुभ भावों का स्वामी हो लेकिन खुद शत्रु ग्रहों या अशुभ ग्रहों के साथ बैठा हो तो इसके अच्छे

    प्रभावों को शक्ति देने के लिए मूंगा धारण करना चाहिए।

    Discount Upto: 29%
    6,199.008,790.00
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    Red Coral/Moonga 6.05 Carat

    6,199.008,790.00
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    Yellow Sapphire/Pukhraj 2.90 Carat

    Sold By: Gems Stone

    “ज्योतिष और पुखराज के लाभ:

    बृहस्पति एक शक्तिशाली ग्रह है। इस ग्रह की अच्छी दृष्टी जहां मानव को धनवान बनाती है और समाजिक सम्मान दिलाती है वहीं यदि यह विपरीत फल दे तो अत्यंत बुरेफल देता है। इसलिए पुखराज सभी नहीं पहन सकते। इसको खरीदने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष शास्त्री से कुंडली दिखवा ले। कुंडली में इन परिस्तियों में पुखराज पहनें:

    • बृहस्पतिके ग्रह धनु और मीन लग्न वाले व्यक्तियों को पुखराज अवश्य पहनना चाहिए।
    • कुंडलीमें अगर बृहस्पति मेष,वृषभ, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर राशियों में स्थापित हो तो पुखराज पहनना चाहिए।
    • मेष,वृष, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर में से किसी भी राशि में यदि बृहस्पति उपस्थित हो तो पुखराज पहनना लाभकारी होता है।
    • बृहस्पतिअगर मकर राशि में हो तो पुखराज पहनने में देर नहीं करनी चाहिए।
    • बृहस्पतिधनेष होकर नौवे घर में, चौथे घर का स्वांमी होकर ग्यारवें भाव में, सातवें भाव का स्वामी होकर दूसरे भाव में और भाग्येश होकर चौथे भाव मेंं हो तो पुखराजपहनना शुभ फल कारक होता है।

    • उत्तमभाव में स्थित बृहस्पति यदि अपने भाव से छठे या आठवें स्थान पर स्थापित हो तो पुखराज जरूर पहनना चाहिए।
    • बृहस्पतिकी महादशा में या किसी भी महादशा में बृहस्पति का अंतर हो तो भी पुखराज पहनना लाभकारक होता है।
    • विवाहमें अड़चने आती हो तो शुभ कार्यों का कारक बृहस्पति के रत्न पुखराज को धारण करने से विवाह शीघ्र हो जाता है।
    • पुखराजपहनने से हमारा मन शांत रहता है और बुरे विचारों में कमी आती है”
    Discount Upto: 51%
    2,200.004,500.00
    Sold By: Gems Stone

    Yellow Sapphire/Pukhraj 2.90 Carat

    2,200.004,500.00
  • Yellow Sapphire/Pukhraj 3.40 Carat

    Sold By: Gems Stone

    “ज्योतिष और पुखराज के लाभ:

    बृहस्पति एक शक्तिशाली ग्रह है। इस ग्रह की अच्छी दृष्टी जहां मानव को धनवान बनाती है और समाजिक सम्मान दिलाती है वहीं यदि यह विपरीत फल दे तो अत्यंत बुरेफल देता है। इसलिए पुखराज सभी नहीं पहन सकते। इसको खरीदने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष शास्त्री से कुंडली दिखवा ले। कुंडली में इन परिस्तियों में पुखराज पहनें:

    • बृहस्पतिके ग्रह धनु और मीन लग्न वाले व्यक्तियों को पुखराज अवश्य पहनना चाहिए।
    • कुंडलीमें अगर बृहस्पति मेष,वृषभ, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर राशियों में स्थापित हो तो पुखराज पहनना चाहिए।
    • मेष,वृष, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर में से किसी भी राशि में यदि बृहस्पति उपस्थित हो तो पुखराज पहनना लाभकारी होता है।
    • बृहस्पतिअगर मकर राशि में हो तो पुखराज पहनने में देर नहीं करनी चाहिए।
    • बृहस्पतिधनेष होकर नौवे घर में, चौथे घर का स्वांमी होकर ग्यारवें भाव में, सातवें भाव का स्वामी होकर दूसरे भाव में और भाग्येश होकर चौथे भाव मेंं हो तो पुखराजपहनना शुभ फल कारक होता है।

    • उत्तमभाव में स्थित बृहस्पति यदि अपने भाव से छठे या आठवें स्थान पर स्थापित हो तो पुखराज जरूर पहनना चाहिए।
    • बृहस्पतिकी महादशा में या किसी भी महादशा में बृहस्पति का अंतर हो तो भी पुखराज पहनना लाभकारक होता है।
    • विवाहमें अड़चने आती हो तो शुभ कार्यों का कारक बृहस्पति के रत्न पुखराज को धारण करने से विवाह शीघ्र हो जाता है।
    • पुखराजपहनने से हमारा मन शांत रहता है और बुरे विचारों में कमी आती है”
    Discount Upto: 34%
    3,180.004,849.00
    Sold By: Gems Stone

    Yellow Sapphire/Pukhraj 3.40 Carat

    3,180.004,849.00
  • Yellow Sapphire/Pukhraj 2.90 Carat

    Sold By: Gems Stone

    “ज्योतिष और पुखराज के लाभ:

    बृहस्पति एक शक्तिशाली ग्रह है। इस ग्रह की अच्छी दृष्टी जहां मानव को धनवान बनाती है और समाजिक सम्मान दिलाती है वहीं यदि यह विपरीत फल दे तो अत्यंत बुरेफल देता है। इसलिए पुखराज सभी नहीं पहन सकते। इसको खरीदने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष शास्त्री से कुंडली दिखवा ले। कुंडली में इन परिस्तियों में पुखराज पहनें:

    • बृहस्पतिके ग्रह धनु और मीन लग्न वाले व्यक्तियों को पुखराज अवश्य पहनना चाहिए।
    • कुंडलीमें अगर बृहस्पति मेष,वृषभ, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर राशियों में स्थापित हो तो पुखराज पहनना चाहिए।
    • मेष,वृष, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर में से किसी भी राशि में यदि बृहस्पति उपस्थित हो तो पुखराज पहनना लाभकारी होता है।
    • बृहस्पतिअगर मकर राशि में हो तो पुखराज पहनने में देर नहीं करनी चाहिए।
    • बृहस्पतिधनेष होकर नौवे घर में, चौथे घर का स्वांमी होकर ग्यारवें भाव में, सातवें भाव का स्वामी होकर दूसरे भाव में और भाग्येश होकर चौथे भाव मेंं हो तो पुखराजपहनना शुभ फल कारक होता है।

    • उत्तमभाव में स्थित बृहस्पति यदि अपने भाव से छठे या आठवें स्थान पर स्थापित हो तो पुखराज जरूर पहनना चाहिए।
    • बृहस्पतिकी महादशा में या किसी भी महादशा में बृहस्पति का अंतर हो तो भी पुखराज पहनना लाभकारक होता है।
    • विवाहमें अड़चने आती हो तो शुभ कार्यों का कारक बृहस्पति के रत्न पुखराज को धारण करने से विवाह शीघ्र हो जाता है।
    • पुखराजपहनने से हमारा मन शांत रहता है और बुरे विचारों में कमी आती है”
    Discount Upto: 31%
    2,240.003,250.00
    Sold By: Gems Stone

    Yellow Sapphire/Pukhraj 2.90 Carat

    2,240.003,250.00
  • Yellow Sapphire/Pukhraj 4.75 Carat

    Sold By: Gems Stone

    “ज्योतिष और पुखराज के लाभ:

    बृहस्पति एक शक्तिशाली ग्रह है। इस ग्रह की अच्छी दृष्टी जहां मानव को धनवान बनाती है और समाजिक सम्मान दिलाती है वहीं यदि यह विपरीत फल दे तो अत्यंत बुरेफल देता है। इसलिए पुखराज सभी नहीं पहन सकते। इसको खरीदने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष शास्त्री से कुंडली दिखवा ले। कुंडली में इन परिस्तियों में पुखराज पहनें:

    • बृहस्पतिके ग्रह धनु और मीन लग्न वाले व्यक्तियों को पुखराज अवश्य पहनना चाहिए।
    • कुंडलीमें अगर बृहस्पति मेष,वृषभ, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर राशियों में स्थापित हो तो पुखराज पहनना चाहिए।
    • मेष,वृष, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर में से किसी भी राशि में यदि बृहस्पति उपस्थित हो तो पुखराज पहनना लाभकारी होता है।
    • बृहस्पतिअगर मकर राशि में हो तो पुखराज पहनने में देर नहीं करनी चाहिए।
    • बृहस्पतिधनेष होकर नौवे घर में, चौथे घर का स्वांमी होकर ग्यारवें भाव में, सातवें भाव का स्वामी होकर दूसरे भाव में और भाग्येश होकर चौथे भाव मेंं हो तो पुखराजपहनना शुभ फल कारक होता है।

    • उत्तमभाव में स्थित बृहस्पति यदि अपने भाव से छठे या आठवें स्थान पर स्थापित हो तो पुखराज जरूर पहनना चाहिए।
    • बृहस्पतिकी महादशा में या किसी भी महादशा में बृहस्पति का अंतर हो तो भी पुखराज पहनना लाभकारक होता है।
    • विवाहमें अड़चने आती हो तो शुभ कार्यों का कारक बृहस्पति के रत्न पुखराज को धारण करने से विवाह शीघ्र हो जाता है।
    • पुखराजपहनने से हमारा मन शांत रहता है और बुरे विचारों में कमी आती है”
    Discount Upto: 35%
    3,499.005,400.00
    Sold By: Gems Stone

    Yellow Sapphire/Pukhraj 4.75 Carat

    3,499.005,400.00
  • Yellow Sapphire/Pukhraj 3.40 Carat

    Sold By: Gems Stone

    “ज्योतिष और पुखराज के लाभ:

    बृहस्पति एक शक्तिशाली ग्रह है। इस ग्रह की अच्छी दृष्टी जहां मानव को धनवान बनाती है और समाजिक सम्मान दिलाती है वहीं यदि यह विपरीत फल दे तो अत्यंत बुरेफल देता है। इसलिए पुखराज सभी नहीं पहन सकते। इसको खरीदने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष शास्त्री से कुंडली दिखवा ले। कुंडली में इन परिस्तियों में पुखराज पहनें:

    • बृहस्पतिके ग्रह धनु और मीन लग्न वाले व्यक्तियों को पुखराज अवश्य पहनना चाहिए।
    • कुंडलीमें अगर बृहस्पति मेष,वृषभ, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर राशियों में स्थापित हो तो पुखराज पहनना चाहिए।
    • मेष,वृष, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर में से किसी भी राशि में यदि बृहस्पति उपस्थित हो तो पुखराज पहनना लाभकारी होता है।
    • बृहस्पतिअगर मकर राशि में हो तो पुखराज पहनने में देर नहीं करनी चाहिए।
    • बृहस्पतिधनेष होकर नौवे घर में, चौथे घर का स्वांमी होकर ग्यारवें भाव में, सातवें भाव का स्वामी होकर दूसरे भाव में और भाग्येश होकर चौथे भाव मेंं हो तो पुखराजपहनना शुभ फल कारक होता है।

    • उत्तमभाव में स्थित बृहस्पति यदि अपने भाव से छठे या आठवें स्थान पर स्थापित हो तो पुखराज जरूर पहनना चाहिए।
    • बृहस्पतिकी महादशा में या किसी भी महादशा में बृहस्पति का अंतर हो तो भी पुखराज पहनना लाभकारक होता है।
    • विवाहमें अड़चने आती हो तो शुभ कार्यों का कारक बृहस्पति के रत्न पुखराज को धारण करने से विवाह शीघ्र हो जाता है।
    • पुखराजपहनने से हमारा मन शांत रहता है और बुरे विचारों में कमी आती है”
    Discount Upto: 35%
    2,550.003,950.00
    Sold By: Gems Stone

    Yellow Sapphire/Pukhraj 3.40 Carat

    2,550.003,950.00
  • Yellow Sapphire/Pukhraj 8.85 Carat

    Sold By: Gems Stone

    “ज्योतिष और पुखराज के लाभ:

    बृहस्पति एक शक्तिशाली ग्रह है। इस ग्रह की अच्छी दृष्टी जहां मानव को धनवान बनाती है और समाजिक सम्मान दिलाती है वहीं यदि यह विपरीत फल दे तो अत्यंत बुरेफल देता है। इसलिए पुखराज सभी नहीं पहन सकते। इसको खरीदने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष शास्त्री से कुंडली दिखवा ले। कुंडली में इन परिस्तियों में पुखराज पहनें:

    • बृहस्पतिके ग्रह धनु और मीन लग्न वाले व्यक्तियों को पुखराज अवश्य पहनना चाहिए।
    • कुंडलीमें अगर बृहस्पति मेष,वृषभ, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर राशियों में स्थापित हो तो पुखराज पहनना चाहिए।
    • मेष,वृष, सिंह, वृश्चिक, तुला, कुंभ या मकर में से किसी भी राशि में यदि बृहस्पति उपस्थित हो तो पुखराज पहनना लाभकारी होता है।
    • बृहस्पतिअगर मकर राशि में हो तो पुखराज पहनने में देर नहीं करनी चाहिए।
    • बृहस्पतिधनेष होकर नौवे घर में, चौथे घर का स्वांमी होकर ग्यारवें भाव में, सातवें भाव का स्वामी होकर दूसरे भाव में और भाग्येश होकर चौथे भाव मेंं हो तो पुखराजपहनना शुभ फल कारक होता है।

    • उत्तमभाव में स्थित बृहस्पति यदि अपने भाव से छठे या आठवें स्थान पर स्थापित हो तो पुखराज जरूर पहनना चाहिए।
    • बृहस्पतिकी महादशा में या किसी भी महादशा में बृहस्पति का अंतर हो तो भी पुखराज पहनना लाभकारक होता है।
    • विवाहमें अड़चने आती हो तो शुभ कार्यों का कारक बृहस्पति के रत्न पुखराज को धारण करने से विवाह शीघ्र हो जाता है।
    • पुखराजपहनने से हमारा मन शांत रहता है और बुरे विचारों में कमी आती है”
    Discount Upto: 21%
    6,300.008,000.00
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    Yellow Sapphire/Pukhraj 8.85 Carat

    6,300.008,000.00
  • Blue Sapphire/ Neelam 100% natural 4.10 Carat

    Sold By: Gems Stone

    “नीलम शनि का रत्न है और अपना असर बहुत तीव्रता से दिखाता है इसलिए नीलम कभी भी बिना ज्योतिषी की सलाह के नहीं पहनना चाहिए। नीलम रत्न को पहनने केलिए कुंडली में निम्न योग होने आवश्ययक हैं।

    • मेष,वृष, तुला एवं वृश्चिक लग्न वाले अगर नीलम को धारण करते हैं तो उनका भाग्योदय होता है।
    • चौथे,पांचवे, दसवें और ग्यारवें भाव में शनि हो तो नीलम जरूर पहनना चाहिए।
    • शनिछठें और आठवें भाव के स्वामी के साथ बैठा हो या स्वयं ही छठे और आठवें भाव में हो तो भी नीलम रत्न धारण करना चाहिए।
    • शनिमकर और कुम्भच राशि का स्वामी है। इनमें से दोनों राशियां अगर शुभ भावों में बैठी हों तो नीलम धारण करना चाहिए लेकिन अगर दोनों में से कोई भी राशि अशुभभाव में हो तो नीलम नहीं पहनना चाहिए।
    • शनिकी साढे साती में नीलम धारण करना लाभ देता है।
    • शनिकी दशा अंतरदशा में भी नीलम धारण करना लाभदायक होता है।
    • शनिकी सूर्य से युति हो, वह सूर्य की राशि में हो या उससे दृष्टी हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।
    • कुंडलीमें शनि मेष राशि में स्थित हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।
    • कुंडलीमें शनि वक्री, अस्त गत या दुर्बल अथवा नीच का हो तो भी नीलम धारण करके लाभ होता है।
    • जिसकीकुंडली में शनि प्रमुख हो और प्रमुख स्थान में हो उन्हें भी नीलम धारण करना चाहिए।
    • क्रूरकाम करने वालों के लिए नीलम हमेशा उपयोगी होता है।”
    Discount Upto: 49%
    4,210.008,250.00
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    Blue Sapphire/ Neelam 100% Natural 5.97 Carat

    Sold By: Gems Stone

    “नीलम शनि का रत्न है और अपना असर बहुत तीव्रता से दिखाता है इसलिए नीलम कभी भी बिना ज्योतिषी की सलाह के नहीं पहनना चाहिए। नीलम रत्न को पहनने केलिए कुंडली में निम्न योग होने आवश्ययक हैं।

    • मेष,वृष, तुला एवं वृश्चिक लग्न वाले अगर नीलम को धारण करते हैं तो उनका भाग्योदय होता है।
    • चौथे,पांचवे, दसवें और ग्यारवें भाव में शनि हो तो नीलम जरूर पहनना चाहिए।
    • शनिछठें और आठवें भाव के स्वामी के साथ बैठा हो या स्वयं ही छठे और आठवें भाव में हो तो भी नीलम रत्न धारण करना चाहिए।
    • शनिमकर और कुम्भच राशि का स्वामी है। इनमें से दोनों राशियां अगर शुभ भावों में बैठी हों तो नीलम धारण करना चाहिए लेकिन अगर दोनों में से कोई भी राशि अशुभभाव में हो तो नीलम नहीं पहनना चाहिए।
    • शनिकी साढे साती में नीलम धारण करना लाभ देता है।
    • शनिकी दशा अंतरदशा में भी नीलम धारण करना लाभदायक होता है।
    • शनिकी सूर्य से युति हो, वह सूर्य की राशि में हो या उससे दृष्टी हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।
    • कुंडलीमें शनि मेष राशि में स्थित हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।
    • कुंडलीमें शनि वक्री, अस्त गत या दुर्बल अथवा नीच का हो तो भी नीलम धारण करके लाभ होता है।
    • जिसकीकुंडली में शनि प्रमुख हो और प्रमुख स्थान में हो उन्हें भी नीलम धारण करना चाहिए।
    • क्रूरकाम करने वालों के लिए नीलम हमेशा उपयोगी होता है।”
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    5,499.007,120.00
  • Ruby/Manik 4.75 Carat

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    “ज्योतिष और माणिक्य के लाभ

    माणिक्य सूर्य का रत्न है। इसको धारण करने के संबंध में कुंडली में सूर्य की स्थिति को देखा जाता है। बेहतर होता है कि किसी जानकार ज्योतिषाचार्य की सलाह लेने के बादही माणिक्य धारण करें किन्तु यहां कुंडली में सूर्य की उपस्थिति के अनुसार माणिक्य धारण करने के विषय में सामान्य बिन्दु प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

    सूर्य लग्न में हो तो सूर्य का तेज कई प्रकार से बाधाएं देता है। इनमें संतान से संबंधित समस्या प्रमुख है। तथा स्त्री के लिए भी यह कष्टदायक होता है। ऐसे लोगों को माणिककदापि नहीं धारण करना चाहिए।

    दूसरे भाव में सूर्य धन प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करता है। जातक की नौकरी और कारोबार में व्यवधान उत्पन्न होता है। इस स्थिति में माणिक्य धारण करना लाभदायक मानाजाता है। माणिक्य सूर्य के प्रभाव को शुद्ध करता है और जातक धन आदि की अच्छी प्राप्ति कर पाता है।

    तीसरे भाव में सूर्य का होना छोटे भाई के लिए खतरा उत्पन्न करता है। ऐसे लोगों के छोटे भाई अक्सर नहीं होते हैं या फिर मृत्यु हो जाती है। सूर्य की इस स्थिति में भीमाणिक्य धारण करना उचित रहता है।

    चौथे भाव में सूर्य नौकरी, ऐशो-आराम आदि में बाधाएं उत्पन्न करता है। ऐसी स्थिति में भी माणिक्य धारण किया जा सकता है।

    पांचवें भाव में सूर्य हो तो अत्यधिक लाभ व उन्नति के लिए माणिक्य पहनना चाहिए।

    यदि सूर्य भाग्येश और धनेश होकर छठे अथवा आठवें स्थान पर हो तो माणिक्य धारण करना लाभ देता है।

    यदि सूर्य सप्तम भाव में हो तो वह स्वास्थ्य संबंधि परेशानियां देता है। ऐसे लोग माणिक्य पहनकर स्वास्थ्य में सुधार महसूस करते हैं।

    सूर्य अष्टमेश या षष्ठेश हो कर पाचवें अथवा नवे भाव में बैठा हो तो जातक को माणिक्य धारण करना चाहिए।

    अगर जन्मकुंडली में सूर्य अपने ही भाव अर्थात अष्टम में हो तो ऐसे लोगों को अविलंब माणिक्य धारण करना चाहिए।

    ग्यारवें भाव में स्थित सूर्य पूत्रों के विषय में चिंता देता है साथ ही बड़े भाई के लिए भी हानिकारक होता है। ऐसे व्यक्तियों को भी माणिक्य धारण कर लेना चाहिए।

    सूर्य बारहवें भाव में हो तो वह आंखों के लिए समस्याएं उत्पन्न करता

    Discount Upto: 54%
    3,655.007,942.00
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    Ruby/Manik 4.75 Carat

    3,655.007,942.00
  • Ruby/Manik 6.10 Carat

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    “ज्योतिष और माणिक्य के लाभ

    माणिक्य सूर्य का रत्न है। इसको धारण करने के संबंध में कुंडली में सूर्य की स्थिति को देखा जाता है। बेहतर होता है कि किसी जानकार ज्योतिषाचार्य की सलाह लेने के बादही माणिक्य धारण करें किन्तु यहां कुंडली में सूर्य की उपस्थिति के अनुसार माणिक्य धारण करने के विषय में सामान्य बिन्दु प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

    सूर्य लग्न में हो तो सूर्य का तेज कई प्रकार से बाधाएं देता है। इनमें संतान से संबंधित समस्या प्रमुख है। तथा स्त्री के लिए भी यह कष्टदायक होता है। ऐसे लोगों को माणिककदापि नहीं धारण करना चाहिए।

    दूसरे भाव में सूर्य धन प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करता है। जातक की नौकरी और कारोबार में व्यवधान उत्पन्न होता है। इस स्थिति में माणिक्य धारण करना लाभदायक मानाजाता है। माणिक्य सूर्य के प्रभाव को शुद्ध करता है और जातक धन आदि की अच्छी प्राप्ति कर पाता है।

    तीसरे भाव में सूर्य का होना छोटे भाई के लिए खतरा उत्पन्न करता है। ऐसे लोगों के छोटे भाई अक्सर नहीं होते हैं या फिर मृत्यु हो जाती है। सूर्य की इस स्थिति में भीमाणिक्य धारण करना उचित रहता है।

    चौथे भाव में सूर्य नौकरी, ऐशो-आराम आदि में बाधाएं उत्पन्न करता है। ऐसी स्थिति में भी माणिक्य धारण किया जा सकता है।

    पांचवें भाव में सूर्य हो तो अत्यधिक लाभ व उन्नति के लिए माणिक्य पहनना चाहिए।

    यदि सूर्य भाग्येश और धनेश होकर छठे अथवा आठवें स्थान पर हो तो माणिक्य धारण करना लाभ देता है।

    यदि सूर्य सप्तम भाव में हो तो वह स्वास्थ्य संबंधि परेशानियां देता है। ऐसे लोग माणिक्य पहनकर स्वास्थ्य में सुधार महसूस करते हैं।

    सूर्य अष्टमेश या षष्ठेश हो कर पाचवें अथवा नवे भाव में बैठा हो तो जातक को माणिक्य धारण करना चाहिए।

    अगर जन्मकुंडली में सूर्य अपने ही भाव अर्थात अष्टम में हो तो ऐसे लोगों को अविलंब माणिक्य धारण करना चाहिए।

    ग्यारवें भाव में स्थित सूर्य पूत्रों के विषय में चिंता देता है साथ ही बड़े भाई के लिए भी हानिकारक होता है। ऐसे व्यक्तियों को भी माणिक्य धारण कर लेना चाहिए।

    सूर्य बारहवें भाव में हो तो वह आंखों के लिए समस्याएं उत्पन्न करता

    Discount Upto: 48%
    4,499.008,612.00
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    Ruby/Manik 6.10 Carat

    4,499.008,612.00
  • Ruby/Manik 4.16 Carat

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    “ज्योतिष और माणिक्य के लाभ

    माणिक्य सूर्य का रत्न है। इसको धारण करने के संबंध में कुंडली में सूर्य की स्थिति को देखा जाता है। बेहतर होता है कि किसी जानकार ज्योतिषाचार्य की सलाह लेने के बादही माणिक्य धारण करें किन्तु यहां कुंडली में सूर्य की उपस्थिति के अनुसार माणिक्य धारण करने के विषय में सामान्य बिन्दु प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

    सूर्य लग्न में हो तो सूर्य का तेज कई प्रकार से बाधाएं देता है। इनमें संतान से संबंधित समस्या प्रमुख है। तथा स्त्री के लिए भी यह कष्टदायक होता है। ऐसे लोगों को माणिककदापि नहीं धारण करना चाहिए।

    दूसरे भाव में सूर्य धन प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करता है। जातक की नौकरी और कारोबार में व्यवधान उत्पन्न होता है। इस स्थिति में माणिक्य धारण करना लाभदायक मानाजाता है। माणिक्य सूर्य के प्रभाव को शुद्ध करता है और जातक धन आदि की अच्छी प्राप्ति कर पाता है।

    तीसरे भाव में सूर्य का होना छोटे भाई के लिए खतरा उत्पन्न करता है। ऐसे लोगों के छोटे भाई अक्सर नहीं होते हैं या फिर मृत्यु हो जाती है। सूर्य की इस स्थिति में भीमाणिक्य धारण करना उचित रहता है।

    चौथे भाव में सूर्य नौकरी, ऐशो-आराम आदि में बाधाएं उत्पन्न करता है। ऐसी स्थिति में भी माणिक्य धारण किया जा सकता है।

    पांचवें भाव में सूर्य हो तो अत्यधिक लाभ व उन्नति के लिए माणिक्य पहनना चाहिए।

    यदि सूर्य भाग्येश और धनेश होकर छठे अथवा आठवें स्थान पर हो तो माणिक्य धारण करना लाभ देता है।

    यदि सूर्य सप्तम भाव में हो तो वह स्वास्थ्य संबंधि परेशानियां देता है। ऐसे लोग माणिक्य पहनकर स्वास्थ्य में सुधार महसूस करते हैं।

    सूर्य अष्टमेश या षष्ठेश हो कर पाचवें अथवा नवे भाव में बैठा हो तो जातक को माणिक्य धारण करना चाहिए।

    अगर जन्मकुंडली में सूर्य अपने ही भाव अर्थात अष्टम में हो तो ऐसे लोगों को अविलंब माणिक्य धारण करना चाहिए।

    ग्यारवें भाव में स्थित सूर्य पूत्रों के विषय में चिंता देता है साथ ही बड़े भाई के लिए भी हानिकारक होता है। ऐसे व्यक्तियों को भी माणिक्य धारण कर लेना चाहिए।

    सूर्य बारहवें भाव में हो तो वह आंखों के लिए समस्याएं उत्पन्न करता

    Discount Upto: 61%
    3,100.007,942.00
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    Ruby/Manik 4.16 Carat

    3,100.007,942.00
  • Emerald/Panna Green 100% Natural Carat 4.20

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    “ज्योतिष और पन्ना रत्न के लाभ

    पन्ना बुध का रत्न है और बुध अच्छे फल देने वाला ग्रह है। इसलिए ज्योतिष में ऐसा माना जाता है कि पन्ना कोई भी पहने उसे लाभ अवश्य होता है। लेकिन कुंडली में निम्नप्रकार की स्थितियां होने पर इसे पहनना ज्यादा फलदायी होता है।

    पन्ना बुध का रत्न है और बुध मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है। इसलिए मिथुन और कन्या लग्न की कुंडली में इसे पहनना बहुत लाभदायक होता है।

    यदि बुध कुंडली में छठे और आठवें भाव में हो तो भी पन्ना पहनना फायदा पहुंचाता है।

    बुध अगर कुंडली में मीन राशि में हो तो भी पन्ना पहनना अच्छा होता है। कुंडली में धनेष बुध नौवे स्थान में हो तो पन्ना पहनना लाभ देता है।

    सातवें भाव का स्वामी बुध दूसरे भाव में, नवें भाव का स्वामी बुध चौथे भाव में या भाग्येश बुध छठें भाव में हो तो पन्ना पहनकर बहुत लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

    बुध की महादशा और अंतरदशा में भी पन्ना पहनना अच्छा होता है।

    जन्म कुंडली में बुध श्रेष्ठ भाव में अर्थात 2,3,4,5,7,9,10 और 11 में से किसी का स्वामी हो और अपने से छठे भाव में हो तो भी पन्ना पहनना बहुत अच्छा होता है।

    अगर कुंडली में बुध मंगल, शनि, राहु अथवा केतु के साथ स्थित हो तो पन्ना पहनना चाहिए।

    अगर बुध पर शत्रु ग्रह की दृष्टि हो तो भी पन्ना पहनना चाहिए।

    व्यापार-वाणिज्य, गणित व एकाउंटेंसी संबंधी कार्य से जुड़े लोग पन्ना अवश्य धारण करें। इससे अच्छे फल प्राप्त होंगे।”

    Discount Upto: 47%
    3,499.006,599.00
  • Emerald/Panna 100% Natural 3.85 Carat

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    ज्योतिष और पन्ना रत्न के लाभ

    पन्ना बुध का रत्न है और बुध अच्छे फल देने वाला ग्रह है। इसलिए ज्योतिष में ऐसा माना जाता है कि पन्ना कोई भी पहने उसे लाभ अवश्य होता है। लेकिन कुंडली में निम्नप्रकार की स्थितियां होने पर इसे पहनना ज्यादा फलदायी होता है।

    पन्ना बुध का रत्न है और बुध मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है। इसलिए मिथुन और कन्या लग्न की कुंडली में इसे पहनना बहुत लाभदायक होता है।

    यदि बुध कुंडली में छठे और आठवें भाव में हो तो भी पन्ना पहनना फायदा पहुंचाता है।

    बुध अगर कुंडली में मीन राशि में हो तो भी पन्ना पहनना अच्छा होता है। कुंडली में धनेष बुध नौवे स्थान में हो तो पन्ना पहनना लाभ देता है।

    सातवें भाव का स्वामी बुध दूसरे भाव में, नवें भाव का स्वामी बुध चौथे भाव में या भाग्येश बुध छठें भाव में हो तो पन्ना पहनकर बहुत लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

    बुध की महादशा और अंतरदशा में भी पन्ना पहनना अच्छा होता है।

    जन्म कुंडली में बुध श्रेष्ठ भाव में अर्थात 2,3,4,5,7,9,10 और 11 में से किसी का स्वामी हो और अपने से छठे भाव में हो तो भी पन्ना पहनना बहुत अच्छा होता है।

    अगर कुंडली में बुध मंगल, शनि, राहु अथवा केतु के साथ स्थित हो तो पन्ना पहनना चाहिए।

    अगर बुध पर शत्रु ग्रह की दृष्टि हो तो भी पन्ना पहनना चाहिए।

    व्यापार-वाणिज्य, गणित व एकाउंटेंसी संबंधी कार्य से जुड़े लोग पन्ना अवश्य धारण करें। इससे अच्छे फल प्राप्त होंगे।”

    Discount Upto: 53%
    3,499.007,499.00
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    Emerald/Panna 100% Natural 3.85 Carat

    3,499.007,499.00
  • Ruby/Manik 3.81 Carat

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    “ज्योतिष और माणिक्य के लाभ

    माणिक्य सूर्य का रत्न है। इसको धारण करने के संबंध में कुंडली में सूर्य की स्थिति को देखा जाता है। बेहतर होता है कि किसी जानकार ज्योतिषाचार्य की सलाह लेने के बादही माणिक्य धारण करें किन्तु यहां कुंडली में सूर्य की उपस्थिति के अनुसार माणिक्य धारण करने के विषय में सामान्य बिन्दु प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

    सूर्य लग्न में हो तो सूर्य का तेज कई प्रकार से बाधाएं देता है। इनमें संतान से संबंधित समस्या प्रमुख है। तथा स्त्री के लिए भी यह कष्टदायक होता है। ऐसे लोगों को माणिककदापि नहीं धारण करना चाहिए।

    दूसरे भाव में सूर्य धन प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करता है। जातक की नौकरी और कारोबार में व्यवधान उत्पन्न होता है। इस स्थिति में माणिक्य धारण करना लाभदायक मानाजाता है। माणिक्य सूर्य के प्रभाव को शुद्ध करता है और जातक धन आदि की अच्छी प्राप्ति कर पाता है।

    तीसरे भाव में सूर्य का होना छोटे भाई के लिए खतरा उत्पन्न करता है। ऐसे लोगों के छोटे भाई अक्सर नहीं होते हैं या फिर मृत्यु हो जाती है। सूर्य की इस स्थिति में भीमाणिक्य धारण करना उचित रहता है।

    चौथे भाव में सूर्य नौकरी, ऐशो-आराम आदि में बाधाएं उत्पन्न करता है। ऐसी स्थिति में भी माणिक्य धारण किया जा सकता है।

    पांचवें भाव में सूर्य हो तो अत्यधिक लाभ व उन्नति के लिए माणिक्य पहनना चाहिए।

    यदि सूर्य भाग्येश और धनेश होकर छठे अथवा आठवें स्थान पर हो तो माणिक्य धारण करना लाभ देता है।

    यदि सूर्य सप्तम भाव में हो तो वह स्वास्थ्य संबंधि परेशानियां देता है। ऐसे लोग माणिक्य पहनकर स्वास्थ्य में सुधार महसूस करते हैं।

    सूर्य अष्टमेश या षष्ठेश हो कर पाचवें अथवा नवे भाव में बैठा हो तो जातक को माणिक्य धारण करना चाहिए।

    अगर जन्मकुंडली में सूर्य अपने ही भाव अर्थात अष्टम में हो तो ऐसे लोगों को अविलंब माणिक्य धारण करना चाहिए।

    ग्यारवें भाव में स्थित सूर्य पूत्रों के विषय में चिंता देता है साथ ही बड़े भाई के लिए भी हानिकारक होता है। ऐसे व्यक्तियों को भी माणिक्य धारण कर लेना चाहिए।

    सूर्य बारहवें भाव में हो तो वह आंखों के लिए समस्याएं उत्पन्न करता

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